चीन की मदद से पाकिस्तान बना रहा बांध, भारत को होगा नुकसान

चीन की मदद से पाकिस्तान बना रहा बांध, भारत को होगा नुकसान

पाकिस्तान ने दुनिया का सबसे ऊंचा रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट बांध बनाना शुरू कर दिया है. चार दशकों से जो काम चार प्राधानमंत्री नहीं कर पाए, उसको करने की जिम्मेदारी अब पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने उठाई है. 16 जुलाई 2020 को पीएम इमरान ने विवादास्पद डायमर भाषा बांध का निर्माण कार्य शुरू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है. यह बांध लगभग 8 मिलियन एकड़ फीट जलाशय एरिया में फैला है. साथ ही बांध की ऊंचाई  लगभग 272 मीटर होगी. अगर काम सही से चलता रहा तो 2028 तक इस डैम की पूरी होने की उम्मीद है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मिर में सिंधू नदी पर इस डैम की आधारशिला रखी जाएगी. गिलगित-बाल्टिस्तान में बनाए जा रहे इस बांध को कई दशकों तक भारत के विरोध के चलते रोका जा चुका है. लेकिन अब इंडिया और चाइना के बीच चल रहे विवाद के दौरान इस बांध का एक बार फिर उद्घाटन कर दिया गया है. हालांकि यह डैम पूरी तरह से पाकिस्तान का नहीं होगा. पैसों की कमी के चलते पाकिस्तान इस बांध को चाइना के सपोर्ट से बना रहा है. ऐसे में अगर इस बांध का निर्माण हो जाता है. तो पाकिस्तान देश में एक कीर्तिमान स्थापित कर देगा. साथ ही भारत की मुश्किलें भी बढ़ सकती है.

इस बांध को लेकर चौंकाने वाली बात यह है कि पीएम इमरान से पहले भी कई पाकिस्तानी पीएम इस बांंध का उद्घाटन कर चुके हैं. लेकिन इस प्रोजेक्ट को उच्च लागत, भारत के साथ क्षेत्रीय विवाद और स्थानीय लोगों के विरोध और विदेशी ताकतों के इन्वोलवमेंट के चलते इस डैम का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था. पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट के लिए विश्व बैंक से लेकर एशियाई विकास बैंक तक के चक्कर काटे हैं. लेकिन सभी ने विवादित जमीन देखकर पैसे देने से साफ इनकार कर दिया. इस परियोजना की अनुमानित लागत $14 बिलियन की है. इसके लिए पाकिस्तान ने एक बार देश के लोगों से भी चंदा इकट्ठा करने की कोशिश की थी. लेकिन सफल नहीं हो पाया. इसलिए पाकिस्तान ने चाइना का सहारा लिया. साथ ही इस डैम का 70 प्रतिशत शेयर चाइना को दे दिया. चीन ने इस प्रोजेक्ट को ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ में शामिल कर लिया है.

डायमर भाषा बांध को शेयर के आधार पर देखें तो यह डैम पाकिस्तान का नहीं बल्कि चाइना का है. जो पाकिस्तान की कब्जाई गई जमीन पर बनाया जा रहा है. भारत समेत गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों के द्वारा इस बांध का पूरजोर विरोध किया जा रहा है. इस बांध के चलते अकेले डायमर जिले के 32 गांवों के जलमग्न होने की आशंका है. साथ ही लगभग 50,000 लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा. इसी के साथ जो लोग पहले ही अपनी जमीन खो चुके हैं, उन्हें भी मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. इसी के साथ भारत के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में चीन द्वारा लगातार दखल दिया जा रहा है. भारत और पाकिस्तान के मध्य हस्ताक्षरित सिंधु-जल समझौते में चीन लगातार तीसरा पक्षकार बनने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में इस बांध का विरोध करना भारत के लिए लाजमी है. इस बांध से पाकिस्तान को दो फायदे होंगे. पहला, उसे सस्ते दामों में बिजली मिल पाएगी. दूसरा, बांध बनने से लोगों को रोजगार मिलेगा.

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