एलन मस्क के स्कूल में बच्चों को वो शिक्षा दी जाती है जो कोई स्कूल नहीं देता

एलन मस्क के स्कूल में बच्चों को वो शिक्षा दी जाती है जो कोई स्कूल नहीं देता

दोस्तों, स्कूल की जब भी कभी बात आती है, तो हमें अलग-अलग क्लास के बच्चें, अलग-अलग टीचर्स, स्पोर्ट्स जैसी चीजें याद आती है. सालों से स्कूलों में एक ही जैसा कल्चर, किताबें, लेक्चर, पास-फेल जैसी चीजें चली आ रही हैं. कभी-कभी हलके फुलके बदलाव होते हैं लेकिन वह भी सिर्फ नाम भर के. लेकिन 2014 में 8 बच्चों के साथ खुले एक स्कूल ने स्कूल की दुनिया में अलग ही कंसेप्ट रख दिया है. इस स्कूल में किसी तरह के ग्रेड नहीं होते हैं. साथ ही अलग-अलग उम्र के बच्चे इस स्कूल में एक साथ पढ़ते, बैठते और टीमों में प्रोजेक्ट करते हैं. यहां का पढ़ाई करवाने का तरीका भी बिल्कुल अलग है. यहां ना तो विदेशी भाषाएं सिखाई जाती हैं ना किसी तरह का खेल. यहां पर बच्चों को आमतौर पर स्कूल में मिलने वाली लैब से ज्यादा हाईटैक चीजों पर ध्यान दिया जाता है. दोस्तों, हम बात कर रहे हैं कैलीफोर्निया में एलन मस्क द्वारा बनाए गए ‘एड एस्ट्रा’ नाम के स्कूल की. चलिए जानते हैं आखिर यह स्कूल और स्कूलों से कैसे जुदा और बेहतर है.

एयरोस्पेस कंपनी ‘स्पेस एक्स’ के संस्थापक एलन मस्क ने साल 2014 में स्कूल को लेकर एक नया कंसेप्ट बनाया. स्पेस एक्स के कांफ्रेस हॉल में अपने पांच बेटों और तीन अन्य बच्चों के साथ उन्होंने एक स्कूल शुरू किया. जहां बच्चों की अलग-अलग क्लासेस नहीं होती है. बच्चा चाहे 7 साल का हो या 14 का. दोनों को एक ही साथ बैठकर अपने प्रोजेक्ट तैयार करने होते हैं. एलन मस्क ने इस स्कूल को जोशुआ धन नाम के टीचर के साथ शुरू किया था. इस स्कूल में बच्चों को हर तरह की सुविधा दी जाती है. यहां के सर्कूलम में बच्चों के खेलकूद और म्यूजिक के लिए जगह नहीं है. यहां पर डोजबॉल नाम का मात्र एक स्पोर्ट खेला जाता है. कैलीफोर्निया में बने एड एस्ट्रा में बच्चों को विदेशी भाषाएं भी नहीं सिखाई जाती. यहां पर खासतौर पर बच्चों को उद्यमी बनाने पर जोर दिया जाता है. बच्चों को वह सारी सुविधाएं और छूट दी जाती है, जिससे वह कुछ नया और बेहतर बना सकें. एड एस्ट्रा में बच्चों को ग्रुप में डिवाइड होकर काम करना सिखाया जाता है. इस स्कूल में बच्चों को स्किम, स्विफ्ट और स्क्रेच जैसी कोडिंग भाषाएं सिखाई जाती है. स्कूल की लैब में बच्चों को लिए खास सुविधाएं हैं. यहां पर बच्चों को मौसमी गुब्बारे बनाने से लेकर लड़ाकू रोबोट बनाने की छूट दी गई है.

दोस्तों, इसी के साथ आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि इस स्कूल की अपनी एक करेंसी हैं. स्कूल में किसी भी तरह का सामान खरीदने के लिए बच्चों को एस्ट्रा नाम की मुद्रा की जरूरत पड़ती है. यहां पर बच्चों को उद्यमी बनाने के लिए हर तरह की चीजें सिखाई जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस स्कूल में ज्यादातर स्पेस एक्स के स्टाफ के बच्चे पढ़ते हैं. फिलहाल इस स्कूल में सिर्फ 40 बच्चें ही पढ़ रहे हैं. दोस्तों, इस स्कूल में बच्चों को एपलाइड साइंस के बारे में ज्यादा जानकारी दी जाती है. यहां पर ज्यादातर एक्सपेरीमेंट करके कुछ नया बनाने की कोशिश की जाती है.

दोस्तों, ऐसे स्कूल आने वाले दौर में वक्त की डिमांड भी हो सकते हैं. आने वाले दौर में ऐसे स्कूल आप और हम अपने आस-पड़ोस में ही देख सकते हैं. हालांकि दोस्तों, यह तो थी एक अनोखे और उमदा स्कूल की कहानी. अब आपक बताइए की आपको इस स्कूल की कौन सी बात अच्छी लगी और कौन सी नहीं. क्या आप भी भविष्य में अपने बच्चों को ऐसे स्कूल में दाखिला दिलाना चाहेंगे या नहीं. हमें कमेंट करके जरूर बताएं.

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